ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता अवधेश कुमार के द्वारा DMFT की तीन सौ करोड़ की योजनाओं के टेंडर प्रक्रिया में भारी कमिशन वसूली करने का मामला चर्चा में
DMFT फंड की योजना में टेंडर डिसाइड किए जाने के एवज में चार पर्सेंट कमिशन वसूली करने की बात सामने आ रही है,ढ जांच का विषय बन सकता है। सुत्र
DMFT फंड से स्वीकृत पांच जिला के योजनाओं के टेंडर में भारी कमिशन वसूली करने का मामला चर्चा में है
अवधेश कुमार आर्थिक स्वार्थ सिद्धि के लिए अपने ही आदेश को शिथिल कर एवं विभागीय सचिव के आदेश के बिना दूसरे विभाग के टेंडर प्रक्रिया का निष्पादन कर रहे हैं। सुत्र
santosh verma
Chaibasa ः झारखंड राज्य के पांच जिला में DMFT फंड से तीन सौ करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति जिला के उपायुक्त के द्वारा दी गई है है, जिसमें विशेष प्रमंडल, जिला परिषद, राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम और लघु सिंचाई को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। धनबाद,चतरा, रामगढ़, हजारीबाग और गिरिडीह में सैकड़ों योजना DMFT फंड से स्वीकृत की गई है। जिसका टेंडर निष्पादन यानी CS अप्रूव ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता अवधेश कुमार के द्वारा किया जा रहा है, पहले भी अवधेश कुमार के द्वारा पांच सौ करोड़ की योजनाओं का टेंडर डिसाइड कर चुके हैं। मालूम हो कि अपने विभाग के आलावा दूसरे विभाग के एजेंसी का भी बिना विभागीय आदेश और सहमति के बिना टेंडर डिसाइड कर चुके हैं। ग्रामीण कार्य विभाग के विभागीय सचिव के श्रीनिवासन से किसी प्रकार का कोई आदेश लिए बिना दूसरे विभाग के योजना की टेंडर अप्रूव कर रहे हैं। अधीक्षण अभियंता रहते हुए चार अंचल के जिला स्तर के सभी विभागों की योजनाओं का टेंडर डिसाइड किए हैं, आज भी एक करोड़ से अधिक की योजना राशि की यानी पांच करोड़ तक की जिला स्तर की योजना का टेंडर धड़ल्ले से डिसाइड कर रहे हैं। यूं कहा जा सकता है कि ग्रामीण कार्य विभाग में फंड के अभाव में योजना की स्वीकृति नहीं हो रही है, और टेंडर नहीं हो रहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अवधेश कुमार जिला स्तर की टेंडर अप्रूव कर करोड़ों का कमिशन वसूली करने का चर्चा जोरों पर है। विभागीय सचिव को इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है। अवधेश कुमार ने अपने कार्यालय से एक आदेश जारी किया है कि कोई भी कार्यपालक अभियंता दूसरे विभाग से टेंडर डिसाइड नहीं कराए, अन्यथा दंडनात्मक करवाई की जाएगी, लेकिन अवधेश कुमार अपने उस आदेश को अपने आर्थिक स्वार्थ सिद्धि के लिए शिथिल कर दूसरे विभाग के जिला स्तर के टेंडर डिसाइड कर रहे हैं, जो भरी अनियमितता का विषय है और अवैध कमिशन वसूली का मामला है।

