सारंडा जंगल में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट की चपेट में आया जंगली हाथी, पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त , क्या पुलिस बल को निशाना बनाने के लिए लगाया गया था बम?
santosh verma
Chaibasa ः झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड स्थित सारंडा जंगल में एक जंगली हाथी नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाका इतना तेज था कि हाथी के दाहिने आगे वाले पैर की उंगलियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और उसका पैर बुरी तरह लहूलुहान हो गया। घटना उस समय हुई जब हाथी जंगल के भीतर घूम रहा था। बताया जा रहा है कि यह वही इलाका है जहां सुरक्षाबल नक्सल विरोधी अभियान चलाते रहते हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आईईडी वास्तव में पुलिस या सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लगाया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी चपेट में निर्दोष जंगली हाथी आ गया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक दल मौके पर पहुंचा। घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण घायल हाथी तक पहुंचने में टीम को लगभग चार घंटे का समय लगा। मौके पर पहुंचकर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और केले में दवा मिलाकर हाथी को खिलाया, जिसे उसने खा लिया।
पशु चिकित्सक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हाथी के पैर में गहरा जख्म है, जो किसी बड़े विस्फोट से हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा, “प्राथमिक उपचार में एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और सूजन कम करने की दवा दी गई है। स्थिति गंभीर है, हम उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।”
प्राप्त जानकारी के अनुसार घायल हाथी 10 से 12 वर्ष की मादा है और गंभीर चोट के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ है। वन विभाग की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है, वहीं आसपास के क्षेत्रों में भी खोज अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर सारंडा के जंगलों में नक्सली गतिविधियों और आईईडी के खतरों को उजागर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने मांग की है कि ऐसे इलाकों में सुरक्षा और गश्ती को और सशक्त किया जाए, ताकि नक्सलियों द्वारा लगाए गए बमों से वन्यजीवों और ग्रामीणों की जान को खतरा न हो।
