ईचा खरकई बांध से प्रभावितों का मौलिक अधिककारों का हनन नहीं नहीं देंगे - रेयांश सामड
santosh verma
Chaibasa ःस्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना संविधान के उपबंधों से असंगत तथा झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद द्वारा गठित उप समिति के निर्णयों एवं सुप्रीम कार्ट के आदेश की अवहेलना कर बन रही ईचा खरकई बांध से प्रभावित तिरिंग प्रखंड के 32 गांव में सुविधा बहल करने के संबंध में मयूरभंज जिला उपायुक्त को श्री हेमकांत सोय को संघ के उपाध्यक्ष रेयांश सामड के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा।उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिला अंतर्गत तिरिंग प्रखंड के मुड़:दा, कुलुगुटु, रामबेड़ा, डोकोडीह , चिपीडीह, बिजयबासा, नन्दुआ, मगुआ, नारगी, धोबाडीह, हिसाडीह आदि गांव में तकनीकी त्रुटिपूर्ण के कारण खतियानी रैयतों का माल गुजारी रशीद नहीं काटा जा रहा है।
तिरिंग प्रखंड अंतर्गत जितने भी प्रभावित गांव हैं। ईचा डैम से पूर्ण रूप से डूब क्षेत्र में नहीं आते है। इन गांव के रैयतों का पूर्ण रूप से पुनर्वास भी नहीं हुआ है। तथा जिस जमीनों का मुआवजा नहीं मिला है। उन जमीनों को भी उसमें शामिल कर लिया गया है। जिससे रैयतों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तिरिंग प्रखंड अंतर्गत 32 गांव प्रभावित क्षेत्र में होने के कारण यहां विकास कार्य बंद कर दिया गया है। जिससे हमारा मौलिक अधिकारो का हनन हो रहा है। इसे अविलंब बहल करते हुए विकास कार्य चालू की जाए। झारखंड विधानसभा 2024 के चुनाव में लगातार दूसरी बार झामुमो और कांग्रेस इंडिया गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिली। इस सरकार में पहली जनजातीय परामर्शदातृ परिषद की बैठक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। परिषद की बैठक में ईचा खरकई बांध को डूब क्षेत्र कम कर 18 गांव को ही प्रभावित कर बांध पुनः निमार्ण की सहमति प्रदान की गई है। संवैधानिक पहलू और सुप्रीम कार्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए। आदिवासी हित के लिए बनी संवैधानिक संस्था से असंवैधानिक फैसल लेकर कोल्हान के 126 गांव के आदिवासी मूलनिवासी प्रभावित ग्रामीणों के साथ विश्वासघात किया। आदिवासी मूलनिवासी रैयतों को हेमंत सोरेन की नेतृत्व वाली अबुआ सरकार ने छलने का काम किया है।
जिससे कोल्हान में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपने सरकार के विरूद्ध अस्तित्व, अस्मिता और पहचान के लिए संघर्षरत हैं। प्रतिनिधिमंडल में कुलुगुटु ग्राम पंचायत नायक सरपंच कालीचरण कालुंडिया, भूतपूर्व जिला परिषद सीमा कालुंडिया, जगजीवन कालुंडिया, चैतन्य बास्के, मांगो गोडसोरा, दुर्गाचरण पूरती, गुलाराम मुर्मू, बाटे पूरती, बिरसिंह हेंब्रम, सनातन हेंब्रम, जयराम हेंब्रम, हरीश चंद्र सामाड, सूरजा हेंब्रम, तिरुंग पूरती, दुर्गा पूरती, चौधरी कालुंदिया, जादू बिरुली, बुदु कालुंडिया उपस्थित थे।


