चाईबासा जिले के सर्जीकल अस्पताल जहां मरिजों को वेड तक नहीं मिलता खाट लेकर सदर अस्पताल पहूंचे जिला परिषद सदस्य माधवचंद कुंकल, इमरजेंसी में नहीं मिला मरीज को बेड

चाईबासा के सदर अस्पताल में ये कैसी स्वास्थय सुविधा की व्यवस्था जो सरकार के वायदे पर उठा रहा सवाल 



चाईबासा जिले के सर्जीकल अस्पताल जहां मरिजों को वेड तक नहीं मिलता  खाट लेकर सदर अस्पताल पहूंचे जिला परिषद सदस्य माधवचंद कुंकल, इमरजेंसी में नहीं मिला मरीज को बेड 



santosh verma

Chaibasa ः झारखंड के धनी जिला में से एक पश्चिमी सिंहभूम जिला है जो हर साल करोड़ों रुपए का राजस्व सरकार को उपलब्ध कराता है,जिस जिले में करोड़ों करोड़ रुपए DMFT फंड में जमा हो उस जिले के सबसे बड़े सर्जरी सदर अस्पताल चाईबासा में मरीजों का लिए इलाज के लिए बेड तक नहीं है । इस राज्य के मंत्री,विधायक हल्का सा सर्दी जुकाम होने पर एयरलिफ्ट से दिल्ली के महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराते है लेकिन झारखंड की गरीब और आम जनता को बेड की सुविधा तक नहीं है। सदर अस्पताल चाईबासा के इमरजेंसी वार्ड में बरामदे में जमीन में लिटाकर मरीजों को सलाइन चढ़ाया जा रहा है तो किसी को स्ट्रेचर में सलाइन चढ़ाया जा रहा है तो किसी मरीज को कुर्सी में ही बैठकर इलाज कराना पड़ रहा है। 

झारखंड सरकार अस्पताल में सुविधा की उपलब्धता को कम और सिर्फ बिल्डिंग बनाने को ही विकास समझ रही है। मंझारी प्रखंड के जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल ने 70वर्षीय बुजुर्ग कृष्ण पूर्ति को बेड नहीं मिलने की स्तिथि में घर से ही खटिया लेजाकर मरीज के लिए इलाज का व्यवस्था कराया।जिला परिषद सदस्य ने कहा कि झारखंड में इलाज की बेहतर सुविधा सिर्फ मंत्री,संत्री,विधायक और अफसरों को ही है। गरीब आदमी का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है इसलिए आगे से मरीज इलाज कराने सदर अस्पताल आए तो घर से खटिया भी लेकर चलें।अस्पताल में बेड मिलने की कोई गारंटी भी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री डाक्टर इरफान अंसारी का काम सिर्फ कागजों और भाषणों तक ही सीमित है।वहीं दुसरी ओर अस्पताल प्रबंधन सामान खरिदने के नाम पर करलेते है लाखों करोबार का काम क्यों की यहां कमीशन का होता है खेला,यदी देखना हो तो जिले कई स्वास्थय केंद्रों में देखने को मिलेगा सामानों की खरिददारी तो कर ली गई लेकिन ना उसका उपयोग है और ना रखने का जगह.

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