महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से होगी लिखित शिकायत, ग्रामीण कार्य विभाग को भ्रस्टाचार मुक्त बनाने की होगी मांग

कौन है बिपिन कुमार जिसे ठिकेदार और अभियंता बुलाते हैं बिपिन बाबु कह कर

वही बिपिन कुमार हैं जो अपने ऊंचे पहुंच और पैरवी के बल पर दस साल से जमें हैं ग्रामीण कार्य विभाग में


चाईबासा/संतोष वर्मा: कौन है बिपिन कुमार जिसे ठिकेदार और अभियंता बिपिन बाबु कह कर बुलाते हैं। हां यह वही बिपिन कुमार हैं जो अपने ऊंचे पहुंच और पैरवी के बल पर दस साल से ग्रामीण कार्य विभाग में जमे हुए हैं। हां यह वही बिपिन कुमार हैं जो संजीव कुमार लाल के वसुली अभियान में शामिल होने की बात कही जा रही है, जो अब तक ईडी के पकड़ से बाहर हैं। बिपिन कुमार की अहमियत इसलिए भी विभाग में और पदाधिकारी से अधिक है की अभियंता के स्थापना, टाईम एक्सटेंशन, योजना और विशेष कर जेएसआरआरडीए में निविदा कार्य के लिए प्रतिनियुक्ति में रहना।कार्मिक विभाग में बिपिन कुमार की पहुंच और चलती का यह आलम है कि अपने इच्छानुसार दस साल से ग्रामीण कार्य विभाग में अपना राजपाट चला रहें हैं।

सूत्रो की माने तो कार्मिक विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी और पदाधिकारी को मैनेज कर दस साल से अधिक समय से कार्यरत हैं। जब भी ट्रासंफर पोस्टिंग का फाइल बढ़ता है तो बिपिन कुमार धन वर्षा कर रुकवा लेते हैं।सूत्रो की माने तो बिपिन कुमार का टेंडर प्रक्रिया और टाईम एक्सटेंशन में बड़ी भूमिका रहती है।बिपिन कुमार जेल में बंद विभाग के पूर्व मंत्री आलम गिर आलम और संजीव कुमार लाल के सबसे नजदीकी के रूप में जाने जाते थे।सूत्रो के अनुसार एक सामाजिक संगठन के द्वारा जल्द ईडी कार्यालय में बिपिन कुमार का सारा कार्यकलाप और भूमिका की जानकारी दी जाने वाली है।

सूत्रो के अनुसार बिपिन कुमार पर आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने जा मामला दर्ज किया जा सकता है।मालूम हो कि करोड़ो कैश कांड में ईडी द्वारा पकड़े गए संजीब कुमार लाल ने बिपिन कुमार को विभाग का सर्वे सर्वा बना दिया था। बिपिन कुमार और विभाग के चर्चित संयुक्त सचिव रंजित रंजन प्रसाद की गहरी सांठ गांठ से विभाग में एक छत्र राजपाट चलाया जा रहा है। हां यह वही रंजीत रंजन प्रसाद हैं जिसकी चर्चा जोरों पर है।

बिपिन कुमार की हैसियत यह है कि झारखंड के दिग्गज नेता, अभियंता, पदाधिकारी सब नतमस्तक रहते हैं।अब भी ग्रामीण कार्य विभाग में पूर्व की तरह टेंडर मैनेज और वसुली अभियान चलने से इनकार नहीं किया जा सकता है। महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से होगी लिखित शिकायत, ग्रामीण कार्य विभाग को भ्रस्टाचार मुक्त बनाने की होगी मांग।

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