चाईबासा : "हो" समाज की प्राचीन भाषा-संस्कृति को बचाने हेतु समाज के लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से आदिवासी "हो" समाज युवा महासभा की टीम ने मझगाँव प्रखंड के घोड़ाबांधा, बाईपी एवं ओढ़िशा सीमावर्ती क्षेत्र के तिलोकुटी में सामाजिक जागरूकता अभियान चलायी। सामाजिक, सांस्कृतिक, पारंपरिक तथा पारंपरिक भटकाव जैसे घटनाओं को रोकने हेतु ऐतिहासिक पहल्लुओं से समाज के लोगों को जगाया गया।
अभियान के माध्यम से आदिवासी हो समाज महासभा के मानद सदस्य, साधारण सदस्य तथा आजीवन सदस्य के बारे में ग्रामीणों को जानकारी दिया गया। लोगों को सदस्यता लेने के लिए प्रेरित किया गया। आज के समय में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा ऐतिहासिक आधार की भावना से ग्रामीणों को जोड़ा गया। सामाजिक और धार्मिक एकरूपता के लिए बल लगाया गया।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री इपिल सामड ने जानकारी दिया कि "हो" समाज की जन्म -संस्कार, मंत्यु संस्कार और विवाह संस्कार के अलावे विभिन्न पारंपरिक त्योहारों के अनुष्ठानों के अनुपालन, विकास तथा संरक्षण के लिए भावी पीढ़ियों को जिम्मेवारी लेना होगा। आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने "हो" समाज की गरिमा पर प्रकाश डाला और लोगों से अपील किया कि जब अधिसूचित क्षेत्रों में आदिवासी भाषा-संस्कृति के विकास तथा संरक्षण देने के लिए ट्राईबल लॉ तथा जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा हेतु कानून का प्रावधान किया गया है।
अधिसूचित क्षेत्रों में बाहरी और विदेशी संस्कृति को षडयंत्र के तहत प्रवेश कराना एवं भटकाना एक संवैधानिक रूप से अनुचित है।एक-घर,एक-कैलेण्डर का उद्देश्य के साथ लोगों के बीच कैलेण्डर वितरण करते हुए आदिवासी हो समाज युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरूवा,पूर्व अनुमंडल अध्यक्ष शेरसिंह बिरूवा,मझगाँव प्रखंड अध्यक्ष प्रोसेस उर्फ अनिल चातर तथा अन्य लोगों ने जगह-जगह पर आदिवासी भाषा-संस्कृति के संरक्षण और समाजहित में अभियान को संबोधित किया।
इस अवसर पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा प्रखंड उपाध्यक्ष नंदलाल तिरिया, सांस्कृतिक सचिव संजय केराई, सदस्य राजेन्द्र हेम्ब्रम, त्रिलोक हेम्ब्रम, दशरथ हेम्ब्रम, राजेश पिंगुव्, दिप्तीकांत केराई, टाईगर पिंगुवा, ब्रिजलाल लागुरी, गुरूचरण कुल्डी, अर्जुन हेम्ब्रम, गोपाल हेम्ब्रम, हरिश हेम्ब्रम, कृष्णा हेम्ब्रम, सबीर ताँती, रासिका हेम्ब्रम, चंद्रमोहन हेम्ब्रम, अनिल हेम्ब्रम, सुधीर कुम्हार, चंद्रशेखर हेम्ब्रम, सरोज हेम्ब्रम आदि काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।



