पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा की एक - एक कार्यकर्ता के संघर्ष और मेहनत से चुनाव जीतेंगे

भारतीय जनता पार्टी जिला चुनावी कार्यालय में गुरुवार को भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की बैठक हुई


चाईबासा/संतोष वर्मा : भारतीय जनता पार्टी जिला चुनावी कार्यालय में गुरुवार को भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की बैठक हुई। जिसका अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मंजीत कोड़ा ने किया। जिसमें मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, प्रदेश महामंत्री विजय मेलगण्डी, कोल्हान प्रभारी सह पूर्व माझगांव प्रत्याशी भूषण पाट पिंगुवा, प्रदेश सदस्य मंगल सिंह गिलुवा, शिवा बोदरा शामिल थे।


बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्रीमती गीता कोड़ा को विजयी बनाने के रणनीति बनाई गई। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा की एक - एक कार्यकर्ता के संघर्ष और मेहनत से चुनाव जीतेंगे। महागठबंधन की सरकार ने आदिवासियों के नाम पर ढोंग की राजनीति की है। भाजपा ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी समाज को सम्मान देने का काम किया। भाजपा ने आदिवासियों के जननायक वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा को सम्मान देने का काम किया। भाजपा जिला अध्यक्ष संजय पाण्डेय ने कहा की कहा की भाजपा ने अलग राज्य बनाकर कर दिया। 


झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने हमेशा से अलग राज्य की चिंता नहीं की। कांग्रेस के सामने झारखंडियों का आंदोलन को बेचने का काम किया। राजद की सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा था की झारखण्ड कभी भी अलग नहीं बन सकती, अलग राज्य बनेगी तो मेरे लाश के ऊपर। ऐसा बोलने वालों के साथ मिलकर आज झामुमो मिलकर राज्य चलाने का काम कर रही है। यह राज्य की जनता के लिये कितना दुर्भाग्य की बात है। जनजातीय समाज के प्रमुख नेताओं को जनजातीय समाज के बीच जाकर केंद्र सरकार की योजनाओं और भाजपा द्वारा आदिवासी समाज के लिये किये कार्यों को बताने का निर्देश दिये।

बैठक में महामंत्री तीरथ जामुदा, उपाध्यक्ष खुशबू हेमब्रम, रानी बंदिया, सुभाष पडेया, हरिचरण संडिल, मंत्री सारिम सिंह बिरुवा, राजवो होनहागा, बिनोदनी बानरा, कोषाध्यक्ष शत्रुघ्न हेमब्रम, नगर अध्यक्ष पंकज टोप्पो, रवि बांकीरा, मण्डल अध्यक्ष प्रशांत पिंगुवा, चर्चिल केराई, सुखराम लागूरी, दामोदर बारी, मोरन सिंह हेमब्रम, नसरु बोईपाई, राजेश बारी, सतारी तियू, रोवी लकड़ा, जगन्नाथ तीयू, माटा सिंकु, सुखदेव लकड़ा, रमेश लुगुन आदि उपस्थित थे।

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