महिला समिति अध्यक्ष ने कहा दारू पर रोक नही तो होगा हांडी फोड़, भट्टी तोड़ आंदोलन
चाईबासा : जैंतगढ़ आस पास देसी दारू का बहुत बड़ा बाजार है। यहां से दो राज्यों झारखंड ओडिसा के तीन जिलों पश्चिमी सिंहभूम, ओडिसा के केंदुझार और मयूरभंज जिले के दर्जनों गांवों तक दारू की आपूर्ति की जाती है। क्षेत्र में बकायदा भट्ठे लगा कर महुवा से चुलाए कर देसी दारू बनाई जाती है।फिर इसे वाहनों के ट्यूब में भरकर दूर दराज भेजा जाता है। जैंतगढ़ आस पास हाट परिसर और भंगा पुल चोक में प्रशाशन की नाक के नीचे ये धंधा फल फूल रहा है।क्षेत्र मे लोकल दो दर्जन भर से अधिक गावो में लगभग 2500 लीटर दारू की रोजाना खपत बताई जाती है।वही रोजान कम से कम 4 हजार लीटर दारू बाहर सप्लाई की जाती है। इस अवसर पर तीन से चार गुना अधिक दारू की आपूर्ति की योजना है।
इन गावों में बनती है दारू
बांस कांटा, कादो कोड़ा, मनिक पुर, देव गांव, सियाल जोड़ा, गितिल पी, रामो साही, गर्दी सही, छन पदा, पट्टा जैंत, गुटु साही, बरु सही, खूंटियां पदा, बारला, मंडल, कोंडर कोड़ा, गुमूरिया और तुरली आदि। इनमे बांस कांटा और खूंटियां पदा में सबसे अधिक दारू निर्माण की सूचना है।
महिला समिति अध्यक्ष प्रमिला पत्रा ने कहा क्षेत्र में दारू कुटीर उद्योग का रूप धारण कर चुका है।आबकारी विभाग और प्रशाशन खाना पूर्ति मात्र करते है।अब तक कई बार छपा मारी हुई पर ये धंधा दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की पर है। पर्व पर लोग परिवार के साथ निक लते है।सरकारी रोक के बावजूद हर पर्व तेहवार और उत्सव पर खुल्लम खुल्ला दारू बिकती है।
पर्व के रंग में भंग न पड़े इसके लिए आबकारी और प्रशाशन धंधे को समूल नाश करे अन्यथा हम महिलाएं हांडी फोड़, भट्ठी तोड़ प्रशाशन की पोल खोल आंदोलन च महिला समिति अध्यक्ष प्रमिला पत्रा ने कहा क्षेत्र में दारू कुटीर उद्योग का रूप धारण कर चुका है। आबकारी विभाग और प्रशाशन खाना पूर्ति मात्र करते है। अब तक कई बार छपा मारी हुई पर ये धंधा दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की पर है। पर्व पर लोग परिवार के साथ निक लते है।सरकारी रोक के बावजूद हर पर्व तेहवार और उत्सव पर खुल्लम खुल्ला दारू बिकती है।
पर्व के रंग में भंग न पड़े इसके लिए आबकारी और प्रशाशन धंधे को समूल नाश करे अन्यथा हम महिलाएं हांडी फोड़,भट्ठी तोड़ प्रशाशन की पोल खोल आंदोलन चलाने को बाध्य होंगे।
