जादूगोड़ा में डी ए ई की कैरम प्रतियोगिता के समापन के बाद अगली प्रतियोगिता भारी जल बोर्ड मनुगुरू (कर्नाटक) में होगी

देश_ भर 5_ 10 फरवरी को जुटेंगे सुर संगम के कलाकार 


जादूगोड़ा : जादूगोड़ा में  परमाणु ऊर्जा विभाग की कैरम प्रतियोगिता के आज  समापन  हो गया।इधर अगली प्रतियोगिता भारी जल बोर्ड मनुगुरू( कर्नाटक ) में  रखी गई है। यूसील की जादूगोड़ा व तुम्मा पल्ली यूरेनियम प्रोजेक्ट समेत  महाराष्ट्र, तारापुर मुंबई, हैदराबाद, जादूगोड़ा से करीबन 70 के आस-पास आगामी  5-10 फरवरी को जुटेंगे  सुर संगम के कलाकार।

इस प्रतियोगिता में यूसील की तुम्ममापल्ली यूरेनियम प्रोजेक्ट के अतिरिक्त अधीक्षक विपिन शर्मा का गोलकुंडा टीम से एकल संगीत प्रतियोगिता के लिए चयन किया वही अन्य प्रतियोगिता मसलन  एकल गायन, समूह गीत, हिंदुस्तानी और कर्नाटक गायन शास्त्रीय संगीत, संगीत वाद्ययंत्र प्रदर्शन, समूह नृत्य, एकल नृत्य में अपनी सुरो  का प्रदर्शन करेगे। इस  सांस्कृतिक कार्यक्रम में अजंता, एलोरा, गोलकुंडा,द्वारिका,कोणार्क,पुस्कर, रामेश्वरम, नागार्जुन कुल आठ टीमें  शिरकत करेंगी। जिसकी अगुवाई  हेवी वॉटर बोर्ड, मनुगुरु द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी करेगी।

कार्यक्रमों के मुख्य आयोजक हैवी वाटर बोर्ड के एस.जग्गा राव, महाप्रबंधक, एच.के.शर्मा, डीजीएम (ईएस) और संयोजक,  एस.वी.वाघमोडे, भारी पानी बोर्ड के सदस्य सचिव हैं। इधर यूसील  की तुम्मलापल्ली इकाई से श्री विपिन शर्मा के चुने जाने पर कंपनी के खेल अध्यक्ष सी.मथिवनन खेल सचिव  के.नागराजू और तुम्मलापल्ली यूनिट के कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी और एकल गायन और समूह गायन स्पर्धाओं में उनके प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। 

गोलकुंडा टीम के अन्य प्रतिभागियों में  के.टी. मांजरेकर, एस. हरिनारायण, सुचिता, परमाणु खनिज प्रभाग से अरविन कुमार और कुणाल, सतीश कुमार, परमाणु ईंधन परिसर से अनुराग, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से  किरण पंडित चुने गए है। भारी जल बोर्ड ,भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक घटक इकाई है। संगठन मुख्य रूप से भारी पानी (डी2ओ) के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ अनुसंधान रिएक्टरों में मॉडरेटर और शीतलक के रूप में किया जाता है। भारत दुनिया में भारी पानी के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है। इसी प्रकार, भारत के पास दबावयुक्त भारी जल रिएक्टरों का दुनिया का सबसे बड़ा बेड़ा है जो भारत की अधिकांश परमाणु ऊर्जा आपूर्ति का उत्पादन करता है।

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