सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : जिला मुख्यालय सरायकेला खरकाई नदी तट पर स्थित श्मशान काली मंदिर भी दीपावली अमावस्या में भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण उक्त मंदिर दीपावली में कुछ खास बनी हुई है। लोगों ने बताया कि राजा राजवाड़ समय से यह श्मशान काली पीठ स्थली आस्था का केंद्र है। अब तो भव्य मंदिर बन गया है।
अमावस्या में चारों ओर दीपावली व काली पूजा उत्सव का उल्लास है। लोग अपने घरों के आंगन में दिए जलाकर दीपोत्सव का रसम बनाने में मशगूल हैं। मान्यता है कि रक्तबीज असुर का वध के बाद शक्ति रूपिणी माता महाकाली जग में पूजी जाती रही है। मार्कंडेय पुराण में भी इसका जिक्र है।
मान्यता यह भी है कि श्री राम 14 वर्ष वनवास पूरी कर व रावण वध करके स्वदेश लौटने पर इनका भव्य स्वागत प्रजा ने की थी। इसीको दीपोत्सव के रूप में भी मनाया जाता रहा है।
सरायकेला बाजार स्थित काली मंदिर में भक्त श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पुराना बस स्टैंड के निकट स्थित मंदिर में भी सरकारी प्रयास से काली पूजा उत्सव का आयोजन किया गया है।
दीपोत्सव के मौके पर लोगों ने लोकल मेड दिये का खरीदारी भी की। मिट्टी से बने दिये व खिलौना मॉडर्न समय में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यहां तक की दीपोत्सव पर हर घर के आंगन में बनी रंगोली भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
बिजली लाइट से चकाचौंध के बीच पारंपरिक मिट्टी के दिए व मिट्टी का खिलौना लोगों के नजर से ओझल नहीं हुई है। दीपावली में लोगों के आंगन में मिट्टी के दिए भी शोभा बढ़ा रहा है। चारों ओर दीपावली व काली पूजा का उल्लास है।




