अजीब विडंबना है....

चाईबासा नगर परिषद का अधिकार क्षेत्र 21 वार्डो पर है और कुल आबादी लगभग 47000 होगी,

शहर में प्रतिदिन लगभग 16 टन कचरा उत्पन्न होता है


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : नोएडा स्थित पायनियर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को लगभग 102 करोड रुपए में शहर की साफ सफाई का कार्य सौपा गया था एवं उन्हें 14 गाड़ियां सौपी गई थी प्रतिदिन शहर के प्रत्येक घर से कचरा उठाने के लिए। 

तथा नगर परिषद के सफाई कर्मी एवं संसाधन अलग से कार्य कर रहे हैं इस शहर की साफ सफाई के लिए इसके बावजूद शहर का मुख्य बाजार को छोड़कर मुहललों की बात करें तो लगभग सभी मोहल्ले की मुख्य के सड़क के दोनों किनारे गंदगी की सजावट एवं बड़ी-बड़ी झाड़ियां देखने को आसानी से देखने को मिलती है बड़े-बड़े डस्टबिन कई सप्ताह तक भरी पड़ी रहती है।
 
कई बार बोर्ड में शहर की ऐसी स्थिति के लिए पायनियर कंपनी को फटकार लगाई गई थी एवं कई बार उसे चेतावनी दी गई थी कि अगर यही स्थिति रही तो बोर्ड के माध्यम से सरकार से मांग की जाएगी कि इस कंपनी को हमारे शहर की साफ सफाई का कार्य अनुबंध रद्द कर दिया जाए। और शहर की साफ सफाई नगर परिषद अपने स्तर से करेगी।

आज शहर की मोहल्लों की स्थिति देखकर वह बातें याद आ गई परंतु अफसोस है ..... और सवाल कि अब शहर को इस नरकीय स्थिति से निजात कौन दिलाएगा?

शहर वासियों को उपराजधानी का सपना दिखाकर ऐसी स्थिति में छोड़ा गया कि चलने के लिए गड्ढों से भरी सड़क आम बात सी होके रह गई, आंख मिचौली करने वाली बिजली व्यवस्था, शहर में दुर्गंध छोड़ता तालाब, बिना पार्किंग का बाजार, पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नहीं , स्वास्थ्य व्यवस्था तो ऐसा कि गरीबों को भी बड़ी-बड़ी दुकानों से दवा लेना मजबूरी , और उपचार की व्यवस्था तो ऐसी की 21वीं सदी में भी मलेरिया से जिला मुख्यालय अस्पताल में बच्चे की मौत, शहर के हर मोहल्ले में मच्छर की स्थिति तो यह बन कर रह गई है कि मोहल्ला उनका और यहां रहने वाले लोग किराएदार।

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