संसद में महिला आरक्षण बिल लाना भाजपा का चुनावी स्टंट है : रामहरि गोप


चाईबासा : आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के सिंहभूम लोकसभा प्रभारी रामहरि गोप ने कहा कि लोकसभा चुनाव के छः महीने पहले नए संसद में महिला आरक्षण बिल लाना भाजपा का चुनावी स्टंट है। यह कार्य 2014 और 2019 में भी किया जा सकता था लेकिन सरकार ने दोनों कार्यकाल के समाप्ति वर्ष में महिला आरक्षण बिल लाकर देश के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है क्योंकि यह बिल कानून बनने के पश्चात भी लागू नहीं होगा। इस बिल को लागू होने के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जनगणना होनी है। इसके बाद फिर लोकसभा और विधानसभा के सीटों का परिसीमन भी किया जाना है इसके पश्चात ही इस बिल को लागू किया जाना है। इस प्रकार से इस बिल को लागू होने में लगभग 2031 तक का समय लग सकता है।

    हैरत की बात यह है कि महिला आरक्षण बिल में ओबीसी महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं है जो कि इस देश में लगभग 52 प्रतिशत से अधिक ओबीसी की जनसंख्या है फिर भी इतनी बड़ी आबादी के महिलाओं को महिला आरक्षण में हिस्सेदारी ना देना साजिश है। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के महिलाओं के लिए भी अलग से कोई प्रावधान नहीं की गई है। इन वर्गों के महिलाओं को पहले से ही जो सीट आरक्षित की गई है इसी आरक्षित सीट से ही 33% दी जाने की बात कही गई है।

इससे स्पष्ट होता है की महिला आरक्षण बिल को लेकर सिर्फ साजिश कर देश के लोगों को गुमराह किया जा रहा है, ना की महिलाओं को न्याय। इस प्रकार से अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए इस बिल के माध्यम से सिर्फ जुमला दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर सामान्य वर्गों के महिलाओं के लिए अघोषित रूप से 33% सीट आरक्षित की जा रही है यह देश के लिए और एक न्याय संगत लोकतांत्रिक देश के लिए खतरनाक साबित होगा। क्योंकि महिलाओं की आदी आबादी होने के बावजूद अलग-अलग वर्गों के महिलाओं को अपने ही कोटे में सीमित की जा रही है और सामान्य वर्ग के महिलाओं के लिए अघोषित रूप से सीटों को आरक्षित करने की षड्यंत्र रची जा रही है। इन सभी पहलुओं को देखें तो सरकार अपनी चुनावी वायदे के लिए इस बिल को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तैयार की है।

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