चाईबासा : टाटा कॉलेज सामान्य छात्रावास में मंगलवार को वारंङ क्षिति लिपि के जनक ओत् गुरु लाको बोदरा की 104वीं जयंती मनायी गयी. छात्रावास के अधिनायक रोहित हेंब्रम की अध्यक्षता में यह आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र संघ के श्री वासुदेव सिंकु उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि लाको बोदरा का जन्म विशिष्ट कार्यों के लिए हुआ था और उनकी विशेष कृति के कारणों से ही उनकी जयंती मनायी जा रही है. उन्होंने कहा कि लिपि भाषा को अभिव्यक्ति करती है और किसी भी भाषा की लिपि हो तो उससे भाषा, संस्कृति और संपूर्ण समाज गौरांवित होता है. लाको बोदरा ने लिपि का आविष्कार किया।
हो भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की आवश्यकता है. आठवीं अनुसूची में शामिल होने से रोजगार, व्यवसाय और आधिकारिक भाषा हो सकती है।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौजूद वासुदेव सिंकु, रोहित हेंब्रम, दिनेश महतो, लक्ष्मण विरूआ, प्रहलाद हेंब्रम, सुखलाल गोप, रशिम नाथ, मधुसूदन तिरिया, लक्ष्मण गुंजा, रविंद्र नाथ तिरू आदि छात्र उपस्थित थे।