सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : कोल्हन विश्वविद्यालय चाईबासा ऑडिटोरियम में केंद्रीय साहित्य अकादमी एवं स्नातकोत्तर ओड़िया भाषा साहित्य विभाग, कोल्हान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सिंहभूमि ओड़िया भाषा साहित्य व संस्कृति संगोष्ठी में वंश प्रभा लेखन हुआ उजागर।
इससे पहले कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति गंगाधर पंडा ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया। केंद्रीय साहित्य अकादमी के क्षेत्रीय सचिव(कोलकाता) देवेंद्र कुमार देवेश ने स्वागत भाषण दिया। साहित्य अकादमी के गौर हरिदास, कोल्हान विश्वविद्यालय छात्र कल्याण संकाय के अध्यक्ष सुरेश चंद्र दास, स्नातकोत्तर ओड़िया भाषा एवं साहित्य विभाग के प्रधान मनोज कुमार महापात्र, प्रवास रंजन साहू के अलावे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिनेश सडंगी आदि कार्यक्रम में मौजूद थे।
उद्घाटन सत्र के बाद संगोष्ठी का प्रथम सत्र की अधिवेशन विजयानंद सिंह की अध्यक्षता में हुई। संगोष्ठी में सत्य प्रिय महालिक ने कहा कि ओडिशा में जो भाषा संस्कृति हैं वह प्राय सरायकेला खरसावां सिंहभूम में है। हरिहर प्रधान, मनोज कुमार महापात्र ने भी विचार प्रकट किया। प्रथम सत्र के अधिवेशन के अंत में बालकृष्ण बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी में द्वितीय सत्र के अधिवेशन की अध्यक्षता विजय कुमार सतपथी ने की। संगोष्ठी में पी.के.पाणी ने प्रसिद्ध छऊ कला एवं ओड़िया भाषा साहित्य संस्कृति का जिक्र किया। संगोष्ठी में डॉ अतुल सरदार ने वंश प्रभा लेखन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह ओड़िया भाषा का प्राचीन लिखित दस्तावेज हैं।
वंश प्रभा लेखन डोगरा परिवार द्वारा लिखा गया है। इस क्षेत्र में ओड़िया भाषा होने की सबूत वंश प्रभा लेखन से मिलता है। द्वितीय सत्र के अधिवेशन के अंत में सुचित्रा बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

